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PMCPMC Election 2022 : सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी समाज का स्थानीय स्वराज संस्था में आरक्षण (OBC Reservation) बनाए रखा है। इस वर्ग के इच्छुक उम्मीदवारों में इसे लेकर खुशी का माहौल है, लेकिन इस निर्णय से ओपन गुट की 47 सीटें कम होने से इस वर्ग में अब फिर से महिला आरक्षण (Women Reservation) और उम्मीदवारों (Candidates ) को मिलने वाली टक्कर और तीव्र होने से उनकी धड़कनें तेज हो गई हैं।

स्थानीय स्वराज संस्था में ओबीसी समाज का आरक्षाण कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने से राजनीतिक पेंच फंस गया था। सभी राजनीतिक पार्टियों ने साफ कर दिया था कि ओबीसी आरक्षण के बिना वे चुनाव में शामिल नहीं होंगे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने समय पर चुनाव कराने का आदेश दिया था। ऐसे में समस्या खड़ी हो गई थी कि ओबीसी आरक्षण के बिना चुनाव होगा कैसे?

148 सीटें ही ओपन गुट के लिए

कोर्ट के निर्देश पर अंतिम प्रभाग रचना घोषित कर उस पर अनुसूचित जाति और जनजाति का आरक्षण निश्चित किया गया। पुणे में 173 में से 23 सीटे अनुसूचित जाति और दो सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया। ऐसे में शेष बचे 148 सीटें ओपन गुट के लिए थी। इसके बाद राजनीतिक दलों ने इसकी घोषणा की थी कि ओबीसी को आरक्षण नहीं मिला तो वे 27 फीसदी सीटों पर ओबीसी उम्मीदवार उतारेंगे, लेकिन इसकी अनिवार्यता नहीं होने के कारण ओपन गुट के कई इच्छुकों ने नगरसेवक बनने का मौका मिलने की संभावना को देखते हुए तैयारी शुरू कर दी थी।

आरक्षण के लॉटरी पर टिकी नजरें

ओबीसी आरक्षण बनाए रखने से ओपन गुट के सीधे 47 सीटें कम होने का झटका ओपन गुट को लगा है। ऐसे में तैयारी में जुटे उम्मीदवारों का ध्यान फिर से आरक्षण की लॉटरी में क्या होगा इस पर टिक गई है। साथ ही अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण की लॉटरी निकलने के बाद ओपन गुट के प्रभाग में कौन होगा, इसमें महिलाओं के लिए कौन आरक्षित है, यह स्पष्ट हो गया है। इसके बाद कई इच्छुकों ने खुद के घर की महिला उम्मीदवार बने इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए थे, लेकिन ओबीसी आरक्षण की लॉटरी निकलने पर ओबीसी महिलाओं के लिए 24 और ओपन वर्ग की महिलाओं के लिए 50 सीटें निश्चित होगी। ऐसे में चुनाव की तैयारी में जुटे इच्छुकों की एक बार फिर से परेशानी शुरू हो गई है। इनमें ओबीसी समाज के उम्मीदवारों को ओपन गुट के लिए संघर्ष करना पड़ता, लेकिन अब ओबीसी का आरक्षण बनाए रखने की वजह से ओबीसी उम्मीदवारों को राहत मिली है। उनके हक की 47 सीटें आरक्षित हो गई हैं।

फडणवीस ने हमें सत्ता दिलाने और चार महीने में आरक्षण दिलाने की बात कही थी। कोर्ट में सभी बातें सही तरीके से रखी जाए इसके लिए फडणवीस वकीलों के संपर्क में थे। इसलिए यह आरक्षण मिला है।

-जगदीश मुलीक, शहर अध्यक्ष, बीजेपी, पुणे

पहले ही उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट कर दिया था कि आरक्षण के बिना चुनाव नहीं होगा। आगामी चुनाव में शिवसेना ओबीसी सीटों पर अच्छे उम्मीदवार को उतारकर उन्हें चुनकर लाने के लिए तैयार है।

-गजानन थरकुडे, शहरप्रमुख, शिवसेना, पुणे

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया आदेश ओबीसी भाइयों और महाविकास आघाड़ी सरकार द्वारा किए गए ईमानदार प्रयास की बड़ी जीत है।

-प्रशांत जगताप, शहर अध्यक्ष, एनसीपी, पुणे

इस आरक्षण के लिए कांग्रेस पहले से प्रयास कर रही थी। महाविकास आघाड़ी के एकजुट प्रयास से सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई जीती इसकी खुशी है।

-अरविंद शिंदे, प्रभारी शहर अध्यक्ष, कांग्रेस, पुणे

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