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 महाराष्ट्र (Maharashtra) में सत्ता से बाहर किए जाने के बाद शिवसेना (Shivsena) ने राज्य विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए दावेदारी पेश की है। शिवसेना विधान पार्षदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरहे से मुलाकात की और नेता प्रतिपक्ष तथा मुख्य सचेतक के पद के लिए दावेदारी पेश की।

इस प्रतिनिधिमंडल में मनीषा कायंदे, सचिन अहीर, अंबादास दानवे, विलास पोतनीस और सुनील शिंदे शामिल थे। लड़ाई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) तथा शिवसेना के बीच है और कुछ सदस्यों के दल बदलने का संदेह है। शरद पवार नीत राकांपा के राज्य विधानमंडल के उच्च सदन में शिवसेना से केवल दो सदस्य कम है।

आठ जुलाई तक 78 सदस्यीय महाराष्ट्र विधान परिषद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 24, शिवसेना के 12 और कांग्रेस तथा राकांपा के 10-10 सदस्य थे। लोक भारती, पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय समाज के एक-एक सदस्य हैं। परिषद में चार निर्दलीय सदस्य भी हैं, जबकि 15 सीट रिक्त हैं। शिवसेना ने पार्टी में बगावत के बाद यह कदम उठाया है। शिवसेना के 55 विधायकों में से 40 ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के साथ जाने का फैसला किया था, जिसके बाद शिंदे गुट ने भाजपा के साथ मिलकर राज्य में नई सरकार बना ली थी।

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