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रायपुर। दुनियाभर को ओमिक्रॉन तेजी से अपनी चपेट में लेता जा रहा है। अब तक दुनिया के लगभग 30 से अधिक देशों में लगभग 400 केसेस सामने आ चुके हैं। बढ़ते संक्रमण के बाद दुनिया के अधिकतर देश अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध लगाते दिख रहे हैं। वहीं भारत सरकार द्वारा अंतराष्ट्रीय उड़ानों के नियमों में परिवर्तन के किये जाने के बाद बाहर से आने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना कर पड़ रहा है। उन्हें एयरपोर्ट पर 2-3 घंटे तक इंतजार करना पड़ा रहा है। भारत सरकार द्वारा किये गये नियमों में परिवर्तन का असर यात्रियों के चेहरे पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
हालांकि डब्ल्यूएचओ की मानें तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध ओमिक्रॉन को रोकने कारगर हथियार नहीं है। यह गरीब देशों को आर्थिक तंगी के मुहाने पर धकेलने का हथियार अवश्य हो सकता है।
दक्षिण अफ्रीका सहित दुनिया के ओमिक्रॉन संक्रमित देशों से अब तक भारत आये लोगों की सही-सही डाटा राज्य सरकारों के पास उपलब्ध नहीं है। यह भी आने वाले समय में घातक सिद्ध हो सकता है।
बताया जा रहा है कि एक ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्ति 18-20 लोगों को संक्रमित कर सकता है। साथ ही कोरोना पॉजिटिव होने के बाद संक्रमित व्यक्ति का सेंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जाता है। जिसमें लगभग एक सप्ताह का समय लग जाता है। यह भी ओमिक्रॉन के संक्रमण को बढ़ाने के लिए कारगर सिद्ध हो सकता है।
10 नवंबर से 2 दिसंबर तक हाई रिस्क वाले देशों से लगभग 2000 से अधिक लोग भारत लौटे हैं। उत्तर प्रदेश में 295, आंध्रप्रदेश में 600, महाराष्ट्र में 485 व कर्नाटक में 57 यात्री वापस लौटे हैं। वहीं हाई रिस्क वाले देशों से छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में भी यात्री लौटे हैं। हालांकि इनकी ठीक-ठीक पुष्टि नहीं हो पायी है।
आने वाले दिनों में हाई रिस्क वाले देशों से लौटे यात्रियों का पहचान कर उन्हें क्वारंटाइन नहीं किया जाता है तो यह परेशानी का सबब बन सकता है। और देश एक बार फिर लॉकडाउन के मुहाने पर पहुंच सकता है। पहली व दूसरी लहर ने जिस तेजी से तबाही मचाई है। उसे सबक लेते हुए ओमिक्रॉन से बचाव व जागरुकता के लिए कार्य करने की जरुरत है।
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