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मंकिपॉक्स का भारत में आने का खतरा विगत के कुछ वर्षों में उच्च स्तरीय मेडिकल उपचारों में प्रगति के साथ नए-नए रोगों से भी मानव जगत का सामना हुआ है। दो वर्ष पहले कोरोना संक्रमण के कोपभाजन का शिकार हुई मानव सभ्यता पर अब मंकिपॉक्स वायरस का खतरा मंडराने लगा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब तक कुल 23 देशों में इसके फैलने की पुष्टि की है।

इनमें मंकिपॉक्स के अब तक करीब 257 मामले सामने आए हैं, जबकि लगभग 120 संदिग्ध मामले हैं। चिंता की बात यह है कि यह बीमारी अधिकतर उन देशों में फैल रहा है, जहां यह आमतौर पर नहीं पाई जाती है। अगर मंकिपॉक्स वायरस बच्चों और रोगग्रस्त लोगों में फैलता है, तो आगे चलकर विकराल रूप ले सकता है।

मंकिपॉक्स का भारत में आने का खतरा

वास्तव में मंकीपाक्स चेचक की तरह होने वाला एक दुर्लभ वायरल संक्रमण है। यह पहली बार 1958 में अनुसंधान के लिए रखे गए बंदरों में खोजा गया था। चूंकि एक बार बंदर के बीच यह बीमारी फैली थी, इसलिए इसका नाम मंकीपाक्स रखा गया।

मानव में मंकीपाक्स का पहला मामला 1970 में सामने आया था। यह रोग मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावन क्षेत्रों में होता है। यह वायरस पाक्सविरिडे परिवार से संबंधित है, जिसमें चेचक रोग पैदा करने वाले वायरस भी शामिल हैं।

मंकीपाक्स के मरीजों में अधिकतर बुखार और चकते जैसे लक्षण पाए जाते हैं। मंकीपाक्स चेचक की तुलना में कम संक्रामक भी है। इससे होने वाली दिक्कतें भी चेचक की अपेक्षा कम घातक हैं। इसके लक्षण दो से चार सप्ताह तक दिखाई देते हैं। हालांकि, कुछ रोगी गंभीर भी हो सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति चकते दिखने से लेकर सभी चकतों की पपड़ी गिरने तक संक्रमण का शिकार हो सकता है।

इसमें मृत्यु दर एक से 10 प्रतिशत तक हो सकती है। सबसे बड़ी बात यह कि बीमारी जानवरों से इंसानों में फैल सकती है। यह संक्रमण जानवरों के काटने या खरोंचने, जंगली जानवरों के मांस, शारीरिक दृव्य, घाव के पदार्थ से सीधा संपर्क, दूषित बिस्तर आदि से फैल सकता है। इंसानों में एक से दूसरे को कटी-फटी त्वचा, श्वांस नली, आंख या नाक के जरिये बीमारी फैलने का खतरा है। संक्रमित के कपड़ों से भी यह बीमारी दूसरे व्यक्ति को लग सकती है।

भारत में मंकीपाक्स का अभी एक भी संदिग्ध मरीज नहीं पाया गया है, लेकिन फिर भी इसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। मंकीपाक्स की रोकथाम और नियंत्रण के लिए टीकाकरण का आकलन करने के लिए अब स्टडी चल रही है।

आरंभ में कोरोना वायरस की अनदेखी की गई और बाद में इसकी भयावहता के कारण लोगों को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ा। इसलिए अतीत की गलतियों से सबक लेते हुए समय रहते सतर्क हो जाना चाहिए, क्योंकि मंकीपाक्स वायरस कब भयंकर रूप धारण कर ले ले, कहा नहीं जा सकता।

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